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मंगलवार, 3 अप्रैल 2018

तलाक! तलाक!! तलाक!!!



तलाक! तलाक!! तलाक!!!


तुमने तो कह दिया
तुम्हारा दिल भी कह दे
तुम्हारे लिए जो होती है
मेरी हर वफ़ा भी कह दे
मेरी रातों में जो आ जाते हैं
तुम्हारे वो ख्वाब भी कह दें
मै जो पूरी करती थी तुम्हारी
हर जरूरत भी कह दे
तुम्हारे अपनों की परेशानी पे
जो आजाती थीं लकीरें मेरे पेशानी पे
वो लकीरें भी कह दें

कह दें बस ये तीन लफ्ज
और पूरा कर दें हिसाब
मेरी पाकीजगी का, मेरी मुहब्बत का, मेरे दर्द का
क्या लौटा सकोगे ?
मेरी पाकीजगी, मेरी मुहब्बत, मेरा दर्द
नहीं!! तुम नहीं लौटा सकते
बस ये तीन लफ्ज बोलकर
साबित कर देते हो
अपनी बेवफाई, बेईमानी और अपनी बदगुमानी?